Monday, June 17, 2019

मुजफ्फरपुर , इंसेफेलाइटिस,बिहार 2019 202

मैं  बिहार के मुजफ्फरपुर के अस्पताल में हो रही मौतों के संदर्भ में कुछ कहना चाह रहा हूँ।जून 2014में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन उसी मुजफ्फरपुर  अस्पताल में गए थे, इसी बीमारी के संदर्भ में गए थे जिसे इंसेफेलाइटिस कहा जा रहा है । 2014 में भी लगभग 139 मौतें इसी बीमारी के चलते हुई थी तब स्वास्थ्य मंत्री जी ने कहा था कि नए आईसीयू ,नए लैब बनाए जाएंगे और 100 बेड की सुविधा बढ़ाई जाएगी और आज जब 2019 में उसी अस्पताल में उसी बीमारी के संदर्भ में  पहुंचे हैं तो उन्होंने ठीक यही बात है फिर से दोहराई कि 100 बेड का अस्पताल बनेगा , नए-लैब खुलेंगे ,बेड की संख्या बढ़ेगी लेकिन पिछले 5 साल में उन्होंने अपने उस पुराने वादे का क्या किया जो 5 साल में इस वादे को पूरा नहीं कर पाए क्या वह अगले साल अगले 5 साल में कर पाएंगे यदि इस तरह का कदम 2014के तुरंत बाद ही उठा दिया गया होता तो शायद आज मौतों का शतक पार नहीं होता । खैर इस संबंध में किसी को कोई चिंता भी नहीं है क्योंकि वह बच्चे बेहद गरीब मजदूरों के हैं । लीची मालिकों के बागानों में काम करने वाले गरीब मजदूर जो स्वयं कुपोषित हैं और उनके बच्चे कुपोषण का शिकार है उन बच्चों के बारे में कोई राजनीति करेगा तो उसे क्या मिलेगा यदि यही हाल किसी प्राइवेट अस्पताल में होता या किसी उच्च वर्गीय परिवारों से आने वाले बच्चों के साथ ऐसा हादसा हुआ होता तो सोचिए क्या यही हश्र होता या पूरे देश में हंगामा हो रहा होता पश्चिम बंगाल की तरह। सोचने वाली बात यह है कि पिछले 5 साल गुजर गए इतनी मौतों को हमने पहले देख लिया लेकिन फिर भी नीतीश सरकार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया ।जानबूझकर ऐसा कदम नहीं उठाया तो क्या इसे हम उस बीमारी की वजह से हुई मौत करार दे या सरकार की लापरवाही द्वारा की गई हत्या ।जब किसी को पता हो कि यह बीमारी आने वाली है हमारे पास सारी सुविधाएं मौजूद हैं ,पैसा है लेकिन फिर भी हम उस व्यवस्था को मजबूत नहीं करते हैं तो कहा यही जाएगा कि जानबूझकर नहीं कर रहे। इतना बड़ा बिहार, इतने सारे डॉक्टर लेकिन फिर भी वह अस्पताल डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहा है सभी आवश्यक दवाइयां उस अस्पताल में मौजूद नहीं है ।

    पहले देखते हैं कि क्या बीमारी है ।दरअसल इंसेफेलाइटिस उन लोगों को अपना शिकार बनाता है जिन बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जो कुपोषित होते हैं जिन्होंने रात को खाना नहीं खाया या कई दिनों से खाना नहीं खाया और सुबह अचानक खाली पेट लीची खा लेते हैं ।एक जो होता है जिसे सामान्य बच्चा पचा लेता है लेकिन कुपोषित बच्चा उसे नहीं पचा पाता और वह जहरीले तत्व रक्त में जाकर के सीधा उसके दिमाग को डैमेज करता है ग्लूकोस बनना बंद कर देता है जिससे ब्रेन डैमेज हो जाता है और सीधे ही लिवर डैमेज होने लगता है जिससे बच्चे की मौत हो  जाती है । 2 डॉक्टर ने इस पर रिसर्च किया जिनमें से एक डॉक्टर अरुण शाह है उन्होंने कहा कि यदि इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को तुरंत ग्लूकोज दिया जाए तो उस बच्चे को बचाया जा सकता है तो देखिए केवल ग्लूकोस देने से ही उस बच्चे की मौत की संभावना को कम किया जा सकता है और यहां 100 बच्चे मर चुके हैं तो सोचे की चिकित्सा व्यवस्था किस तरह की होगी हालांकि अभी बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी उस अस्पताल में नहीं पहुंचे हैं और पहुंचे अभी क्यों गरीबों के बच्चे हैं क्या करेंगे पहुंचकर ? उन्होंने 5 साल में उन 139 मौतों से कुछ नहीं सीखा और बेबस मजदूरों के बच्चों को फिर से 2019 में मरने के लिए मजबूर छोड़ दिया ।देखिए दो बातें हैं- एक तरफ जब किसी एक डॉक्टर पर कोई जानलेवा हमला होता है तो पूरे देश के डॉक्टर डॉक्टर के साथ खड़े हो जाते हैं अच्छी बात है संगठन में शक्ति है अपना दबाव बनाए रखने के लिए जरूरी है ऐसी संगठन में शक्ति को दिखाना ,लेकिन क्या गरीबों के 100 बच्चों की मौतों की किसी को कोई फिक्र नहीं है इन बच्चों की मौतों के साथ कौन खड़ा हो रहा है केंद्र के स्वास्थ्य मंत्री गए वह भी खाली हाथ यह नहीं कि 50 डॉक्टरों की एक विशेष टीम ले जाते दवाइयां ले जाते । तो उन बच्चों की जान को बचाया जा सके लेकिन ऐसा नहीं किया गया इस तरह से गए जैसे किसी बहू की मुंह दिखाई करके आनी है  मुंह दिखाई भी खाली हाथ नहीं होती ।पत्रकारों ने प्रश्न पूछे तो उनके सांसद छोटी घटना कहने लगे ।शर्म आनी चाहिए । जिन मजदूरों के वोटों की अपनी रोटियां सेकते हैं मौज करते हैं सांसद की जिंदगी जीते हैं उन्हीं मजदूरों के बच्चों की कोई परवाह नहीं है ।लाखों करोड़ों रुपए 5 साल में सरकार में पास पहुंचता है ,सब गायब हो जाता है गरीब आदमी को सिर्फ मिलती है मौत। मौतों का शतक पार करने के बाद भी देश में कोई सुगबुगाहट नहीं है कहीं विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा है कहीं कोई कैंडल मार्च निकाला जा रहा है कहीं किसी न्यूज़ चैनल में कोई डिबेट नहीं .